इतिहास
उत्तराखंड राज्य में प्रत्येक जिले में जिला न्यायालय और कुछ तहसील मुख्यालयों में बाहरी अदालतें राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से, मामलों की संख्या, स्थान की स्थलाकृति और जिले में जनसंख्या वितरण को ध्यान में रखते हुए स्थापित की जाती हैं।जिला स्तर पर न्यायालयों की त्रिस्तरीय प्रणालियाँ कार्यरत हैं। ये जिला अदालतें विभिन्न स्तरों पर राज्य के उच्च न्यायालय के प्रशासनिक और पर्यवेक्षण नियंत्रण के तहत उत्तराखंड में न्याय करती हैं। प्रत्येक जिले में सर्वोच्च न्यायालय जिला एवं सत्र न्यायाधीश का होता है। यह सिविल क्षेत्राधिकार का प्रमुख न्यायालय है, जो राज्य के अन्य सिविल न्यायालयों की तरह, मुख्य रूप से बंगाल, आगरा और असम सिविल न्यायालय अधिनियम, 1887 से दीवानी मामलों में अपना अधिकार क्षेत्र प्राप्त करता है। यह सत्र और सत्र मामलों का न्यायालय भी है।
अधिक पढ़ें- ऑफिस ऑर्डर नंबर 40/2026 के संबंध में
- अधिकार-क्षेत्र के संबंध में कार्यालय आदेश संख्या 39/2026
- चयनित पैरा-लीगल वालंटियर्स की सूची – जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चम्पावत
- देहरादून जिले की स्थायी लोक अदालत में सदस्य के एक पद के लिए विज्ञापन के प्रचार-प्रसार के संबंध में।
- विधिक सेवा प्राधिकरण में अधिवक्ता मध्यस्थ (Advocate Mediator) के चयन हेतु आवेदन पत्र।
- सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर (S.A.O) के पद के संबंध में अधिसूचना
- रिट याचिका (C) नंबर 751/2026 हर्षिता ग्रोवर बनाम भारत संघ और अन्य का आदेश
- सिविल जज (सीनियर डिवीज़न) के टारगेट मामलों (जुलाई से दिसंबर) 2026 के संबंध में।
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